योजना का लक्ष्य शिक्षायोजना का मुख्य जोर यह है कि यद्यपि गरीब है पर प्रत्येक मेधावी छात्र को चुकाने में समर्थ होने वित्तीय सहायता प्राप्त करके शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाना है। वित्तीय सहायता के अभाव के कारण किसी योग्य छात्र को उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित न रखा जाए। *Never Stop Learning* निर्देशक:- सुनील कुमार मीना
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Wednesday, 28 March 2018
जाने क्या हो रहा है, कार्यदिवस मे कार्य बहिष्कार करते हैं और अवकाश के दिनों में काउंटर खुलवाते हैं राजस्व वसूली कराते हैं सभी कार्य कराते हैं। तो इसका मतलब क्या है? अगर आपको सरकार के विरुद्ध अपनी आवाज उठानी है तो अवकाश के दिनों में कार्य करना तो पूर्णत: प्रतिबंधित होना ही चाहिए. अगर अवकाश के दिनों में आप काउंटर खुलवा रहे हैं सभी लोगों को बुला रहे हैं तो 24 घंटे या 72 घंटे कार्य बहिष्कार से क्या होगा। जमीनी स्तर पर कुछ नहीं होता नजर आ रहा। सरकार हमारा अहित कर रही है और हम ना चाहते हुए भी सरकार के लिए अपने अधिकारों को भी कुर्बान कर रहे हैं आने वाले 3 दिनों का लेटर जारी हो चुका है सभी अवकाश निरस्त।
Tuesday, 27 March 2018
*महत्वपूर्ण सूचना आज दिनांक 27 मार्च 2018 को शायद 7:00 से 8:00 बजे तक लाइव टुडे चैनल पर सपा बसपा एवं भाजपा के प्रवक्ताओं के साथ विद्युत कार्यालय सहायक संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री सुनील प्रकाश पाल के साथ निजी करण के मुद्दे पर डिबेट होगा* कृपया इस बहस. को सुनने के लिए 7:00 बजे अपने TV ऑन कर ले और लाइव टुडे चैनल ध्यान रखें
*महत्वपूर्ण सूचना आज दिनांक 27 मार्च 2018 को शायद 7:00 से 8:00 बजे तक लाइव टुडे चैनल पर सपा बसपा एवं भाजपा के प्रवक्ताओं के साथ विद्युत कार्यालय सहायक संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री सुनील प्रकाश पाल के साथ निजी करण के मुद्दे पर डिबेट होगा*
कृपया इस बहस. को सुनने के लिए 7:00 बजे अपने TV ऑन कर ले और लाइव टुडे चैनल ध्यान रखें
Thursday, 15 March 2018
IAS Question जानिए जवाब
प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय कहाँ है ?
उत्तर - न्यूयॉर्क में
प्रश्न. भारत का राष्ट्रीय फूल कौन सा है ?
उत्तर - कमल
प्रश्न. DNA का फुल फॉर्म क्या है ?
उत्तर - डीऑक्सीराइबोस न्युकिल्क अम्ल
प्रश्न. मुंबई विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर - 1857
प्रश्न. महाराष्ट्र राज्य के पहले मुख्यमंत्री कौन थे ?
उत्तर - यशवंतराव चव्हाण
प्रश्न. महाराष्ट्र में सबसे लंबी नदी कौन सी है ?
उत्तर - गोदावरी नदी
प्रश्न. महाराष्ट्र राज्य की आधिकारिक भाषा क्या है ?
उत्तर - मराठी
प्रश्न. दुल्हे को अंग्रेजी में क्या कहते है ?
उत्तर - GROOM
ये पौधा सिर्फ 21 दिन में बांझपन और नपुंसकता को जड से खत्म देता है, एक बार जरूर पढ़ें
नमस्कार मित्रों। मैं आज आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहा हूं। जिसे प्राचीन काल में अशुभ माना जाता था। मगर जब इसके औषधीय गुणों की बात की जाए, तो यह पौधा औषधीय गुणों भरपूर है। मैं जिस पौधे की बात कर रहा हूं उसका नाम है, सत्यानाशी का पौधा। यह पौधा इतना गुनी है, कि कितना भी पुराना घाव हो या दाद, खुजली हो उसे चंद समय में ठीक कर देता है।
कहां मिलता है यह पौधा
यह पौधा लगभग भारत के सभी भागों में पाया जाता है और यह पौधा मुख्य रूप से शुष्क क्षेत्रों में बहुतायत से मिलता है। यह आपको खेत-खलिहान, नदी, नाला हर जगह मिल जाएगा। यह पौधा दो प्रकार के फूलों वाला होता है। एक प्रकार की पीले फूलों वाला व दूसरे सफेद फूल वाला। यह दोनों ही प्रकार का पौधा समान रूप से औषधीय प्रयोग वाला होता है। इसके पत्ते कटीले और इसे तोड़ने पर सुनहरे रंग का दूध निकलता है
सत्यानाशी के औषधीय गुण और उनका उपयोग
मित्रों वैसे तो यह पौधा उसके गुणों का भंडार है, परंतु मैं आज आपको इसके प्रमुख घरेलू उपचारों के बारे में बताऊंगा।
निसंतानता अथवा बांझपन
मित्रों बांझपन एक ऐसी समस्या है। जिससे व्यक्ति बुरी तरह टूट जाता है। जब इंसान के पास सब कुछ होता है और संतान नहीं होती है, तो वह सबसे दुखी होता है। निसंतानता का प्रमुख कारण बीज में शुक्राणुओं की कमी होना है। मित्रों अगर कोई भी व्यक्ति इस बीमारी से परेशान है, तो उसे सत्यानाशी के पौधे की जड़ की छाल को छाया में सुखाकर इसका पाउडर बनाकर उपयोग करना चाहिए। इसको सुबह खाली पेट 1 से 2 ग्राम दूध के साथ पी लें। इस पाउडर के नियमित सेवन से निसंतानता और धातु रोग की समस्या जड़ से मात्र 14 दिनों में खत्म हो जाएगी। यदि यह बीमारी अधिक उम्र के व्यक्ति को है, तो इसका प्रयोग 5 से 10 दिन ज्यादा करें। अगर मित्रों हम इसकी जड़ों को धो कर इनका पाउडर बना लें और इनका प्रयोग सुबह मिश्री के साथ लें, तो भी निसंतानता दूर हो सकती है। हमें संतान का सुख प्राप्त हो सकता है। यह पौधा बांझपन के लिए एक रामबाण औषधि की भांति कार्य करता है।
नपुसंकता
अगर मित्रों कोई व्यक्ति नपुसंकता से परेशान है, तो इसके लिए सत्यानाशी की जड़ों को पीसकर पाउडर बनाएं और इतनी ही मात्रा में बरगद का दूध मिलाकर, चने के आकार की गोलियां बना लें। इन गोलियों को लगातार 14 दिन तक सुबह शाम पानी के साथ लेने से नपुसंकता का रोग जड़ से खत्म हो जाएगा। यह पौधा नपुसंकता के लिए एक रामबाण औषधि की भांति कार्य करता है।
अस्थमा
अगर कोई व्यक्ति अस्थमा के रोग से परेशान है, तो उसे सत्यानाशी की जड़ों का चूर्ण एक गिलास दूध या गर्म पानी के साथ लेने पर यह रोग ठीक हो जाता है। मित्रों इसके अलावा भी अगर आपकी कोई समस्या है, तो हमें कमेंट कर जरूर बताना, हम जल्द ही आपकी समस्या पर भी पोस्ट डालने की कोशिश करूंगे।
दोस्तों अगर आपको हमारी यह खबर अच्छी लगे तो कमेंट करके बताएं और लाइक और शेयर जरूर कीजिए और आगे भी ऐसे ही खबर पढ़ते रहने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें, क्योंकि हम हर रोज ऐसी खबर आपके लिए लाते रहते